मोतिहारी, बिहार की धरती पर आज एक ऐसा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण दर्ज हुआ, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पूर्वी चंपारण जिले के कैथवालिया (केसरिया) में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित किया गया। यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक बन गया है।
विराट रामायण मंदिर में ऐतिहासिक शिवलिंग स्थापना
विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग शनिवार, 18 जनवरी 2026 को 33 फीट ऊँचा और लगभग 210 टन वजनी शिवलिंग विधिविधान के साथ मंदिर परिसर में स्थापित किया गया। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। पूरा वातावरण “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।
यह शिवलिंग आकार और वजन दोनों में अद्वितीय है। इसे विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जा रहा है। इसकी स्थापना को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया।
तमिलनाडु से बिहार तक की अद्भुत यात्रा
इस भव्य शिवलिंग का निर्माण तमिलनाडु के प्रसिद्ध शिल्प केंद्र महाबलीपुरम में हुआ। वहां के कुशल शिल्पकारों ने इसे महीनों की मेहनत से तैयार किया।
इसके बाद यह विशाल शिल्प कई राज्यों से होते हुए बिहार पहुंचा।
इस दौरान सुरक्षा और तकनीकी सावधानियों का विशेष ध्यान रखा गया।
मुख्य बिंदु:
● निर्माण स्थल: महाबलीपुरम, तमिलनाडु
● वजन: लगभग 210 टन
● ऊँचाई: 33 फीट
● परिवहन: विशेष ट्रेलर और भारी क्रेन की मदद से
विधिविधान और भक्तिमय माहौल
शिवलिंग की स्थापना के समय वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया। उत्तर भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों से लाए गए पवित्र जल से शिवलिंग का अभिषेक किया गया।
खास बात यह रही कि हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी की गई।
इससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
श्रद्धालु इसे अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बता रहे थे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी
इस ऐतिहासिक अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी उपस्थित रहे। उन्होंने मंदिर निर्माण की प्रगति का निरीक्षण किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि:
“विराट रामायण मंदिर बिहार की पहचान बनेगा।
यह धार्मिक ही नहीं, सांस्कृतिक और पर्यटन का बड़ा केंद्र बनेगा।”
उनके बयान से यह स्पष्ट हुआ कि सरकार इस परियोजना को लेकर गंभीर और प्रतिबद्ध है।
विराट रामायण मंदिर की भव्य योजना
विराट रामायण मंदिर सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि एक विशाल धार्मिक परिसर होगा।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं:
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कुल शिखर: 18
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छोटे-बड़े मंदिर: 22
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मुख्य मंदिर की ऊँचाई: लगभग 270 फीट
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थीम: रामायण पर आधारित
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संभावित पूर्णता: वर्ष 2030
निर्माण पूरा होने के बाद यह मंदिर विश्व के सबसे ऊँचे धार्मिक स्थलों में शामिल होगा।
पर्यटन और स्थानीय विकास को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मंदिर से मोतिहारी और आसपास के इलाकों में पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
इससे:
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स्थानीय रोजगार बढ़ेगा
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होटल और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को फायदा होगा
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बिहार की वैश्विक पहचान मजबूत होगी
यह मंदिर धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बन सकता है।
भविष्य की आस्था का केंद्र
विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग और विराट रामायण मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था और संस्कृति का बड़ा प्रतीक बनेगा।
यह स्थल भारत की आध्यात्मिक विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करेगा।
निष्कर्ष
मोतिहारी में शिवलिंग की स्थापना सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं थी।
यह बिहार के गौरव, संस्कृति और आस्था का उत्सव था।
विराट रामायण मंदिर भविष्य में भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल होगा।
यह क्षण इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
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Disclaimer :
यह समाचार उपलब्ध आधिकारिक जानकारियों, स्थानीय सूत्रों और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। किसी भी प्रकार की त्रुटि अनजाने में हो सकती है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी निर्णय से पहले आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें।यह भी पढ़ें :
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